परसुराम महादेव मंदिर (राजस्थान का अमरनाथ) PARSHURAM MAHADEV MANDIR

 PARSHURAM MANDIR INFORMATION IN HINDI




भगवान विष्णु के अवतार श्री परसुराम जी। भगवान परशुराम सप्त चिरंजीवियों में से एक हैं जिसका अर्थ है कि मान्यता के अनुसार भगवान परशुराम अमर हैं और कहीं न कहीं इस पृथ्वी पर हैं। राजस्थान के छुपे खजाने में एक बेशकीमती हीरा है परसुराम महादेव मंदिर ! मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं?? क्योंकि देश को तो छोड़िए राजस्थान के 99% लोगों को भी नहीं पता है कि प्रदेश में माउंट आबू से भी सुन्दर और प्राकृतिक आभा से समृद्ध कोई स्थान है, जिसे परसुराम महादेव मंदिर कहा जाता है। यहां बारिश के दिनो मे स्वर्ग से भी सुन्दर माहौल बन जाता है। यहाँ कुम्भलगढ राष्ट्रीय उद्यान हैं। यह कुम्भलगढ दुर्ग से 10 किलोमीटर, पाली से करीब 120 और रणकपुर से 7 किलोमीटर दूर हैं। इसे राजस्थान का अमरनाथ धाम भी कहते हैं

 पाली जिले में सैकड़ों धार्मिक स्थान और मंदिर हैं जहाँ लोग घूमने जाते हैं, लेकिन मुख्यतः पाली जिले को लोग बंजर भूमि के लिए जानते हैं। कोई नहीं कल्पना भी नहीं कर सकता कि  राजस्थान में दूसरा कोई हिल स्टेशन भी है,जो शायद उससे भी ज्यादा सुन्दर है  ! शायद इसीलिए कि यहाँ होटल उद्योग की कृपा दृष्टि नहीं हुई है। 



 परशुराम महादेव मंदिर के दर्शन और इसके पर्यटन स्थल की जानकारी –  :
परशुराम मंदिर राजस्थान राज्य के पाली जिले में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह प्रसिद्ध मंदिर भगवान शिव या महादेव को समर्पित है। परशुराम मंदिर एक प्राचीन गुफा है जहां तक पर्यटकों को 500 सीढ़ियों से चढ़कर जाना होता है। यह मंदिर अरावली पहाड़ियों के ऊपर से एक शानदार दृश्य भी  प्रस्तुत करता है, जो तीर्थयात्रीयों और पर्यटकों काफी  
आकर्षित करता है। आप इस मंदिर के द्वार तक पहुंचने के लिए एक छोटा ट्रेकिंग अनुभव ले सकते हैं। परशुराम मंदिर कुंभलगढ़ वन में सबसे अच्छा स्थान माना जाता है।

यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं है बल्कि दूर-दूर से आने वाले पर्यटक भी यहां के सुंदर वातावरण की वजह से आकर्षित होते हैं। परशुराम मंदिर के अतीत के बारे में कई कहानियां भी बताई जाती है, जिसके बारे में आप मंदिर के पुजारियों से भी जान सकते हैं। मंदिर के दर्शन के समय यहां स्थित भगवान गणेश का पवित्र मंदिर और नौ कुंड भी देख सकते हैं। इन कुंडों की सबसे खास बात यह है कि यह कभी नहीं सूखते। इस लेख के माध्यम से हम आपको परशुराम महादेव मंदिर की यात्रा कराने वाले है इसीलिए इस लेख को पूरा  पढ़ें :–

यहाँ ऐसे फव्वारे झरने बहते हैं कि सहज ही विश्वाश नहीं होगा



परशुराम महादेव मंदिर की पृष्ठभूमि:- 
परशुराम महादेव मंदिर के इतिहास की बात करें तो माना जाता है की भगवान विष्णु का छठा अवतार कहे जाने वाले संत परशुराम ने अपनी कुल्हाड़ी से एक गुफा बनाई थी और अरावली पर्वत की तलहटी में भगवान शिव की पूजा की थी। इसी वजह से यहां पहाड़ी के ऊपर परशुराम को समर्पित मंदिर बनाया गया था जिसे हम परशुराम महादेव मंदिर के नाम से जानते हैं।

परशुराम मंदिर  में मेले का आयोजन : – 
यदि आप श्रवण सुकला सप्तमी और सप्तमी के विशेष अवसरों के दौरान मंदिर के दर्शन करने के लिए आते हैं तो आप यहां पर इस समय आयोजित होने वाले विशाल मेले को देख सकते हैं। यहां कई ट्रस्ट भी हैं जो इस त्योहार के दौरान संगीतमय रातों का आयोजन करते हैं। यहां पर भक्तों को भोजन और रहने की सुविधा भी प्रदान करते हैं।

परशुराम महादेव के मंदिर खुलने और बंद होने का समय – 
इस मंदिर के द्वार पूरे सप्ताह खुले रहते हैं और भक्त सुबह 6 से शाम 7 बजे तक किसी भी दिन मंदिर के दर्शन करने के लिए आ सकते हैं।

परशुराम महादेव मंदिर घूमने जाने का सबसे अच्छा समय :– अगर आप परशुराम महादेव मंदिर की यात्रा के लिए जाना चाहते हैं तो बता दें कि यहां आने का अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी के महीनों के समय होता है। अगस्त और सितंबर के महीनों में यहां आयोजित होने वाले भव्य मेले में शामिल होने के लिए आप इस समय भी मंदिर भी जा सकते हैं।




 
रेल मार्ग :-देश के प्रमुख शहरों से रेल मार्ग से पहुंचने पर निकटतम स्टेशन फालना और रानी रेलवे स्टेशन है। यहां से बस या टैक्सी द्वारा मंदिर पहुंचा जा सकता है।

नजदीकी हवाई अड्डे:- यहाँ आप हवाई जहाज से भी पहुँच सकते हैं 
परसुराम महादेव मंदिर तक पहुंचने के लिए आप हवाई जहाज से जोधपुर या उदयपुर पंहुच सकते हैं जो कि निकटतम हवाई अड्डे हैं।


ठहरने के लिए :- दो धर्मशालाएं बनी हुई हैं एक ऊपर जहाँ 500 लोग के ठहरने की व्यवस्था है। और नीचे वाली धर्मशाला में   1000 लोग के ठहरने की व्यवस्था है


इसी तरह की अन्य जानकारी हिन्दी में पढ़ने के लिए मुझे  https://goldenplacestovistinrajasthan.blogspot.com/ पर       follow कर सकते हैं

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